
अजीत मिश्रा (खोजी)
🧭प्रशासनिक लकवे का शिकार सिद्धार्थनगर: विभाग ने थमाया नोटिस, फिर भी ‘प्रेम’ से चल रहे अवैध पैथोलॉजी सेंटर!🧭
- स्वास्थ्य विभाग की ‘सेटिंग’ या लाचारी? 4 महीने से नोटिस का तमाशा, आखिर कार्रवाई से क्यों कांप रहे जिम्मेदार?
- प्रेम पैथोलॉजी की दबंगई या विभाग की मिलीभगत? एसडीएम की रिपोर्ट के बाद भी ‘साहब’ मार रहे हैं कुंडली!
- क्या किसी की ‘बलि’ का इंतजार कर रहा स्वास्थ्य विभाग? नोटिस के बाद भी बंद क्यों नहीं हुई अवैध दुकानें?
- नोडल अधिकारी का फोन ‘मौन’, अवैध संचालकों के उड़े ‘होश’ या प्रशासन ही है मदहोश?
- पंजीकरण खत्म, नोटिस जारी… फिर भी शटर ऊपर! आखिर शोहरतगढ़ में किसकी शह पर चल रहा यह खेल?
- सरकारी आदेश बना रद्दी का टुकड़ा: शोहरतगढ़ में स्वास्थ्य विभाग के ‘नोटिस’ से ज्यादा संचालकों की ‘पहुंच’ भारी!
- नोटिस का ‘अचार’ डाल रहा प्रशासन? महीनों बीते पर कार्रवाई ‘शून्य’, जनता की जान से खिलवाड़ जारी!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
सिद्धार्थनगर/शोहरतगढ़। क्या उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा केवल कागजी घोड़े दौड़ाने के लिए रह गया है? क्या सरकारी नोटिस की कीमत अब रद्दी के भाव के बराबर हो चुकी है? ये सवाल हम नहीं, बल्कि शोहरतगढ़ की सड़कों पर बेखौफ चल रहे वे अवैध पैथोलॉजी सेंटर चीख-चीख कर कह रहे हैं, जिन्हें बंद करने का फरमान स्वास्थ्य विभाग महीनों पहले जारी कर चुका है।
🧭नोटिस का मजाक और ‘साहब’ की खामोशी
हैरानी की बात यह है कि शोहरतगढ़ नगर पंचायत और स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के इर्द-गिर्द कई ऐसे पैथोलॉजी सेंटर फल-फूल रहे हैं, जिनका पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) खत्म हुए अरसा बीत चुका है। विभाग ने 4 महीने पहले नोटिस जारी कर इन्हें तत्काल बंद करने की चेतावनी दी थी। नियम कहता है कि नोटिस मिलने के 1 महीने के भीतर सेंटर बंद हो जाने चाहिए, लेकिन यहाँ तो दिसंबर 2025 की ‘डेडलाइन’ को भी ठेंगे पर रख दिया गया है।
🧭मिलीभगत या मजबूरी?
🔥तस्वीरें साफ हैं—’प्रेम पैथोलॉजी सेंटर’ जैसे संस्थान आज भी खुलेआम संचालित हो रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब उपजिलाधिकारी (SDM) ने खुद GPS फोटो खींचकर साक्ष्य स्वास्थ्य विभाग को भेजे और नोडल अधिकारी एम.एम. त्रिपाठी ने कार्रवाई का आदेश भी दे दिया, तो फिर हाथ किसके रुके हुए हैं?
🔥क्या स्वास्थ्य विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों और इन सेंटर संचालकों के बीच कोई ‘गुपचुप’ सेटिंग चल रही है? जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले इन सेंटरों पर अब तक ताला क्यों नहीं लटका?
🧭फोन उठाने की जहमत तक नहीं!
जब इस गंभीर लापरवाही पर जवाब मांगने के लिए नोडल अधिकारी डॉ. एम.एम. त्रिपाठी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। सरकारी कुर्सी पर बैठकर जनता के सवालों से मुंह फेर लेना क्या प्रशासनिक नैतिकता है?
🧭जिलाधिकारी का सख्त रुख, पर जमीन पर ‘शून्य’
जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर, डॉ. शिवशरणप्पा जी.एन. ने स्पष्ट कहा है कि नोटिस के बावजूद सेंटर चलाने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई होगी। लेकिन साहब, कार्रवाई होगी कब? जब कोई अनहोनी हो जाएगी?
सरकारी तंत्र जब भ्रष्टाचार की अफीम चाटकर सो जाता है, तो शोहरतगढ़ जैसी तस्वीरें सामने आती हैं। यहाँ स्वास्थ्य विभाग के नोटिस की हैसियत एक रद्दी के टुकड़े से ज्यादा कुछ नहीं रह गई है। नगर पंचायत शोहरतगढ़ में पंजीकरण खत्म होने के बाद भी अवैध पैथोलॉजी सेंटर सीना तानकर चल रहे हैं, और जिम्मेदार अधिकारी ‘कागजी खानापूर्ति’ का चश्मा पहनकर तमाशा देख रहे हैं।
✍️प्रशासन से सवाल:
- कागजी शेर क्यों बना स्वास्थ्य विभाग? 4 महीने पहले नोटिस जारी होने के बाद भी एक भी सेंटर पर ताला क्यों नहीं लटका? क्या विभाग केवल नोटिस भेजने की औपचारिकता निभाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है?
- मिलीभगत का काला खेल कब तक? चर्चा आम है कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों और सेंटर संचालकों के बीच ‘महीने’ का खेल चल रहा है। क्या यही वजह है कि नोडल अधिकारी के आदेश के बावजूद कार्रवाई की फाइलें धूल फांक रही हैं?
- जनता की जान से खिलवाड़ क्यों? बिना रजिस्ट्रेशन और बिना मानक के चल रहे ये पैथोलॉजी सेंटर क्या लोगों की रिपोर्ट के साथ खिलवाड़ नहीं कर रहे? अगर गलत रिपोर्ट से किसी की जान जाती है, तो क्या जिलाधिकारी इसकी जिम्मेदारी लेंगे?
- अफसरशाही की बेरुखी क्यों? नोडल अधिकारी एम.एम. त्रिपाठी का फोन न उठाना क्या यह नहीं दर्शाता कि उन्हें जनता की समस्याओं और अपनी ड्यूटी से कोई सरोकार नहीं है? आखिर ये अफसर किससे डर रहे हैं या किसे बचा रहे हैं?
- दिसंबर 2025 का इंतजार क्यों? विभाग कह रहा है कि दिसंबर 2025 तक कभी भी कार्रवाई हो सकती है। क्या प्रशासन अवैध धंधेबाजों को अपनी जेबें भरने के लिए और मोहलत दे रहा है?
🧭SDM की रिपोर्ट पर भी कुंडली मारकर बैठे जिम्मेदार
हैरानी की बात यह है कि जब उपजिलाधिकारी (SDM) ने खुद मौके की लोकेशन और साक्ष्य (GPS फोटो) विभाग को भेज दिए, उसके बाद भी कार्रवाई का न होना प्रशासन की मंशा पर बड़े सवाल खड़े करता है। शोहरतगढ़ CHC के नाक के नीचे चल रहे ये सेंटर विभाग की कार्यप्रणाली का मजाक उड़ा रहे हैं।
निष्कर्ष: सिद्धार्थनगर का स्वास्थ्य विभाग ‘नोटिस-नोटिस’ का खेल खेल रहा है और पैथोलॉजी संचालक प्रशासन की नाक के नीचे चांदी काट रहे हैं। अगर समय रहते इन अवैध दुकानों को बंद नहीं किया गया, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि जिले में कानून का नहीं, बल्कि ‘साठगांठ’ का राज चल रहा है।























